Thursday, 23 November 2017

रामराय गांव का इतिहास

रामहृदय तीर्थ का इतिहास


वेदों  के अनुसार रामहृदय तीर्थ की खुदाई भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के द्वारा की गई है। भगवान परशुराम ने यहाँ तप: किया है।  तभी यह भूमि पवित्र है जहाँ पर अनादि काल से  किसी प्रकार का  विवाद नहीं है। वेदो और विद्वानों द्वारा यह कहा गया है  कि चारों युगों सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलि युग सभी युगों में भगवान् परशुराम विराजमान है। 






भगवान् राम , भगवान् लक्ष्मण , माता सीता  एवं भगवान् हनुमान 



भगवान् परशुराम


यहाँ पर जितने भी अंहकारी क्षत्रिय वंशज  हुए है ,भगवान् परशुराम ने उनका वध करके उनके रक्त से पाँच कुण्डो को  भरा था। फिर उनका उद्धार करने के लिए पिण्डदान किया गया था  और यहाँ से तपस्या: करके भगवान् परशुराम मेहन्द्रगढ़ पर्वत  पर चले गए । 
जो ये पांच कुण्ड रामहृदय तीर्थ, कल्याणी, सुरजकुण्ड, सन्निहित सरोवर और गोविन्द कुण्ड है। 
जो की पांचो कुण्डों के समूह को समन्त पंचक कहा गया है। 



रामहृदय तीर्थ



कल्याणी घाट 


सुरजकुण्ड सरोवर 



सन्निहित सरोवर



और इन पाँच कुण्डों मे साफ़ मन शर्द्धा भावना से स्न्नान करने पर हर तरह के रोगो से मुक्ति मिलती है। ग्रहण के समय  समन्त पंचक पर यानि रामहृदय तीर्थ, कल्याणी, सुरजकुण्ड, सन्निहित सरोवर और गोविन्द कुण्ड पर स्न्नान करने पर पुण्य की प्राप्ती  होती  है। जब इन समन्त पंचक कुण्डो के जल की  जब जाँच की गयी तो TDS (Total dissolved solids) सामान्य से भी कम था ,
पुरे संसार में 68 तीर्थ है, और वेदो में बताया गया है कि पूर्णिमा के दिन 12:00 बजे सभी तीर्थ रामराय तीर्थ  में स्नान करने आते है और कहा जाता है कि पुरे 12 बजे जल के स्तर में कुछ बढ़ोतरी होती है। पूर्णिंमा के दिन 12 बजे स्न्नान करना उन सभी 68 तीर्थो के स्नान के समान माना  जाता  है। 

और विद्वानों द्वारा स्पष्ट किया गया है कि रामराये गाँव में सूर्यनारायण भगवान् के उगते समय के दर्शन कर सकतें है माना जाता है कि ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है हिंदुस्तान में 2 से 3 ऐसे स्थल है जहाँ पर आप ऐसा देख सकते है। श्रीमद भागवत मे कुरुक्षेत्र की 48 कोश के परिक्रमा में रामराय गाँव का उल्लेख है। और इस 48 कोस में केंद्रीय सरकार के द्वारा रामरा को धुर्व केंद्र घोषित किया गया है। 




Informed by: Pandit Ramehar Ji


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